shubhi jeet poetry

जीत

जीत नहीं वो जो हर दौड़ मे मिले,

जीत है वो जो हर दौर मे मिले ।

जीत नहीं वो जो दीवार की शोभा बढ़ाए,

जीत है वो जो दीदार पे नजर आए ।

जीत नहीं उसकी जो सम्भल के चलता जाए,

जीत है उसकी जो गिर के भी दौड़ जाए।

जीत नहीं उसकी जो जीत के रुक जाए,

जीत है उसकी जो जीतता जाए ।

जीत नहीं उसकी जो जीत का जशन मनाए,

जीत है उसकी जो हारने वाले को भी जीत का अहसास कराए ।

जीत नहीं उसकी जो दूसरों से जीत जाए,

जीत है उसकी जो खुद से जीतता जाए ।

Jeet - by Shubhi Mall

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